Khujli Ki Ayurvedic Dawa in Hindi

Khujli ki ayurvedic dawa – दाद-खाज-खुजली एक संक्रामक की बीमारी है, इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, नहीं तो यह धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाती है।

खुजली वाली त्वचा पर खुजली, छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं और उसमें से पानी भी निकल जाता है। यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है।

कभी-कभी यह खुजली पेट के साफ न होने, कब्ज और खून में अशुद्धता के कारण भी होती है। एक दूसरे के कपड़े पहनने से भी बीमारी बढ़ती है। खुजली का तकलीफ रात में ज्यादा होता है।

दाद-खाज- खुजली त्वचा की ऊपरी भाग पर होती है और यह बहुत आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैल सकती है।

दाद और खाज खुजली दोनों अलग-अलग बीमारियां हैं, दाद आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। यह चमकदार त्वचा पर एक गोल और लाल चकत्ते के रूप में प्रकट होता है और खुजली और जलन के साथ होता है।

आयुर्वेद के अनुसार दाद, खाज, खुजली क्या है?

अधिकांश छोटी-मोटी त्वचा की समस्याएं, जैसे फफोले, त्वचा में जलन और सूजन, बाहरी कारकों के कारण हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, ज्वेलरी में निकेल कीड़े के काटने, संक्रमित कटी हुई त्वचा में जलन के कारण सूजन और दर्द पैदा कर सकता है।

साथ ही, आयुर्वेद के अनुसार, पुरानी त्वचा की स्थिति जैसे सोरायसिस, एक्जिमा, पुरानी पित्ती या मुँहासे के आंतरिक कारण होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, रक्त, फेफड़े और यकृत के असंतुलन के कारण उत्पन्न होने वाले विषाक्त पदार्थ त्वचा रोगों का कारण बनते हैं।

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दाद खाज खुजली के कुछ मुख्य प्रकार

  • खुजली
  • पित्ती
  • हीट रैश
  • त्वचा की एलर्जी
  • सोरायसिस
  • संक्रमण

दाद खाज खुजली के कुछ मुख्य कारण

  • धूप में काम करने या लंबे समय तक पसीना बहाने से भी दाद खाज खुजली हो सकती है।
  • खुजली किसी चीज से एलर्जी के कारण भी हो सकती है।
  • यह रोग लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहने से भी हो सकता है।
  • यदि दाद खाज खुजली लंबे समय तक बनी रहती है, तो रक्त में कुछ अशुद्धियाँ हो सकती हैं।
  • पेट साफ साफ न होने और दाद खाज खुजली हमेशा कब्ज के कारण हो सकती है।
  • यदि आप एक दूसरे के कपड़े पहनने से भी खाज-खुजली हो सकती है।

खाज-खुजली के कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार

  • अजवायन का तेल खाज-खुजली पर लगाने से भी आराम मिलता है।
  • नीम के छिलके और चावल की भूसी दोनों को सरसों के तेल में पकाकर मालिश करें।
  • तिल : तिल के तेल में हल्दी मिलाकर लगाने से चर्म रोग नहीं होता है।
  • सरसों के तेल में लहसुन गर्म करें और तेल ठंडा होने पर इसमें थोड़ी सी हल्दी डालकर मसाज करें।
  • गाय के घी में थोडा़ सा लहसुन गर्म करें और ठंडा होने पर मालिश करें।
  • पानी में नींबू के रस और शाहबलूत के चूर्ण को मिलाकर लगाने से चर्म रोगों में आराम मिलता है।
  • भूने हुये सुहागे को पानी में मिलाकर पीने से खुजली तुरंत दूर हो जाती है।
  • खुजली पर गोबर-गोमूत्र लगाने से शीघ्र आराम मिलता है।
  • नारियल के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर गर्म करें और खुजली वाली जगह पर लगाएं।
  • पके केले को नींबू के रस में मिलाकर खुजली वाली जगह पर लगाएं।
  •  नारियल : नारियल के चूर्ण की राख को नारियल के तेल में मिलाकर लगाने से दाद खाज खुजली पर तुरंत आराम मिलता है।
Khujli Ki Ayurvedic Dawa in Hindi
Khujli Ki Ayurvedic Dawa in Hindi

दाद खाज खुजली  लिये हमें इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

  • खुजली वाली जगह को खुजाएँ नहीं, हमारी त्वचा छिल जाती है और खुजली ज्यादा फैलने लगती है।
  • संक्रमित व्यक्ति के किसी भी कपड़े या सामान का प्रयोग न करें
  • अपने पेट को हमेशा साफ रखें, इससे आपको कई तरह की बीमारियों में फायदा होता है।
  • कोशिश करें कि बिना तेल मसाले वाली हरी सब्जियां और खाद्य पदार्थ खाएं
  • दैनिक सबहुन का प्रयोग न करें।
  • अगर आपको साबुन का इस्तेमाल करना ही है तो हल्दी, नीम, तुलसी, गिलोय, एलोवेरा, आंवला जैसे आयुर्वेदिक साबुन का इस्तेमाल करें।
  • यदि खुजली लंबे समय तक बनी रहती है, तो रक्त परीक्षण के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

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Daad khaj khujli ki dawa ayurvedic in hindi

लहसुन: लहसुन में एज़ोइन नामक एक प्राकृतिक एंटी-फंगल एजेंट होता है जो फंगल संक्रमण को ठीक करने में मदद करता है।

लहसुन की एक कली को छीलकर पतले-पतले टुकड़ों में काट लें, पतले टुकड़े को प्रभावित जगह पर लगाएं और उसके चारों ओर पट्टी बांधकर रात भर के लिए छोड़ दें। इसकी जगह लहसुन के पेस्ट का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

हल्दी: हल्दी एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक के रूप में काम करती है। हल्दी और पानी को मिलाकर पेस्ट बना लें और रूई की मदद से प्रभावित जगह पर लगाएं। यह आयुर्वेदिक तरीकों से फंगल संक्रमण का इलाज करता है।

सेब: सेब के सिरके को रूई की मदद से दाद वाली जगह पर लगाएं। इसे दिन में कम से कम चार से पांच बार लगाएं। यह दाद के लिए यह अचूक उपाय है।

 ट्री ऑयल: ट्री ऑयल त्वचा की कई तरह की समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। बेहतर होगा कि टी ट्री ऑयल को दिन में तीन से चार बार रूई की मदद से प्रभावित जगह पर लगाएं। यह आयुर्वेदिक तरीकों से फंगल संक्रमण का इलाज करता है।

सरसों : सरसों के दानों को आधे घंटे के लिए पानी में भिगो दें। इसके बाद इसे पीसकर संक्रमित जगह पर लगाएं। दाद के लिए यह अचूक उपाय है।

 नींबू : लेमन ग्रास का काढ़ा बनाकर दिन में तीन बार पिएं। यह खुजली और संक्रमण से राहत दिलाता है। यह दाद के इलाज में मदद करता है।

करेले का रस और गुलाब जल : करेले के पत्ते और गुलाब जल का रस लगाएं। दाद-खुजली की में यह तुरंत आराम देता है। बेहतर लाभ के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

निष्कर्म :

मुझे उदमीद है कि अपको मेरा पोस्ट Khujli ki ayurvedic dawa in hindi पसंद आया होगा। खुजली बहुत असहज हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि खुजली का कारण जानें और समय रहते इसका इलाज करें। आप चाहें तो अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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